भारत के लगभग सभी परीक्षाओं में प्रमुख रचनाएँ और उनके रचनाकार से प्रश्न पूछे जाते हैं | यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या फिर साहित्य के प्रति विशेष रुचि रखते हैं, तो हिंदी के प्रमुख रचनाकारों का अध्ययन करना आपके लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इस पोस्ट के माध्यम से हिंदी के प्रमुख रचनाकार एवं रचनाएं से आपको बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा के हिंदी विषय में अच्छे मार्क लाने में मदद मिलेगी |
आज हम इस पोस्ट के माध्यम से बिहार में हिंदी के प्रमुख रचनाएं एवं उनके रचनाकारों की कृतियों को देखेंगे | प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, हिंदी के लेखकों ने अपनी अनूठी शैली से समाज को दिशा दिखाने का काम किया है | इन महान लेखकों और उनकी कृतियों का अध्ययन न केवल हमारी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि हमें अपनी संस्कृति से भी जोड़कर रखता है | इसलिए आप इस आर्टिकल प्रमुख रचनाएँ और उनके रचनाकार की सूची में दी जा रही विस्तृत जानकारी जरुर देखें |

प्रमुख रचनाएँ और उनके रचनाकार की सूची | Pramukh Rachnaye Aur Rachnakar | Famous Hindi Writers and Their Works List
📚 प्रमुख लेखक और उनकी रचनाएँ
| क्र.सं. | लेखक का नाम | प्रमुख रचनाएँ |
|---|---|---|
| 1 | मुंशी प्रेमचंद |
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| 2 | जयशंकर प्रसाद |
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| 3 | महादेवी वर्मा |
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| 4 | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ |
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| 5 | हरिवंश राय बच्चन |
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| 6 | धर्मवीर भारती |
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| 7 | फणीश्वरनाथ रेणु |
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| 8 | भगवतीचरण वर्मा |
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| 9 | आचार्य रामचंद्र शुक्ल |
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⭐ परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण Facts
- प्रेमचंद को ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है।
- जयशंकर प्रसाद हिंदी के प्रमुख नाटककार और छायावाद के स्तंभ हैं।
- महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक युग की मीरा’ कहा गया है।
- निराला को ‘छायावाद का विद्रोही कवि’ माना जाता है।
- बच्चन जी की रचना ‘मधुशाला’ विश्व प्रसिद्ध है।
- धर्मवीर भारती की ‘गुनाहों का देवता’ उपन्यास को विशेष प्रसिद्धि मिली।
- फणीश्वरनाथ रेणु की ‘मैला आँचल’ आंचलिक उपन्यास की श्रेष्ठ कृति है।
- ‘चित्रलेखा’ को भगवतीचरण वर्मा की अमर कृति माना जाता है।
बिहार के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी कृतियां
बिहार के कवि विद्यापति, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री, महाकवि केदार नाथ मिश्र, महाकवि मोहन लाल महतो, पंडित हंस कुमार तिवारी, आरसी प्रसाद सिंह, कलक्टर सिंह, जनार्दन प्रसाद झा, डाॅ. कुमार विमल आदि है।
| साहित्यकार | कृतियां |
| फणीश्वरनाथ रेणु | मैला आंचल, जुलूस, पलटू बाबू रोड, दीर्घतया |
| रामधारी सिंह ‘दिनकर’ | प्राणभंग, उर्वशी, रेणुका, द्वन्द्वगीत, हुंकार, रसवंती, चक्रवाल, धूप-छांव, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, सामधेनी, नील कुसुम, सीपी और शंख, परशुराम की प्रतिज्ञा, हारे को हरिनाम |
| बाणभट्ट | कादम्बरी, हर्षचरितम, चंडीशतक |
| विष्णु शर्मा | पंचतंत्र, हितोपदेश |
| चाणक्य | अर्थशास्त्र |
| बाबा नागार्जुन | बाबा बटेश्वरनाथ, हजार-हजार बहों वाली, पारो, कुम्भीपाक, तुमने कहा था, वरुण के बेटे, रतिनाथ की चाची, पुरानी जातियों का कोरस, बलचनमा |
| देवकीनंदन खत्री | चंद्रकांता संतति, भूतनाथ, काजर की कोठरी, नौलखाहार |
| राहुल सांकृत्यायन | बुद्धचर्या, विनय-पिटक, धाम्मपद, दर्शन-दिग्दर्शन |
| जानकी बल्लभ शास्त्री | काकली, गाथा, मेघगीत, अवंतिका, चिन्ताहास, त्रमीप्रस्थ, हंस बुलाया, मन की बात, एक किरण : सौ झाइयां, दो तिनकों का घोंसला, अश्वबुद्ध, अशोक वन, सत्यकाम, जिन्दगी, आदमी प्रतिध्वनि, देवी, नील-झील, पाषणी, तमसा, इरावती, राधा |
| शाह अजीमाबादी | नक्शेपायदार |
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | इंडिया डिवाइडेड, चम्पारण में सत्याग्रह, बापू के कदमों में |
| केदारनाथ मिश्र प्रभात | ज्वाला, कैकयी, ऋतुवंश, प्रषक्रिया |
| शिवसागर मिश्र | दूब जनम छायी |
| रामवृक्ष बेनीपुरी | आम्रपाली, माटी की मूरतें, चिंता के फूल, संघमित्रा |
| वाचस्पति मिश्रा | भाष्य मामति, ब्रहमसिद्धि के टीकाकार |
| डॉ. कुमार विमल | मूल्य और मीमांसा, सर्जना के स्वर, अंगार ये सम्पूट सीपी के, युगमानव बापू, ये अभंग अनुभव अमृत, सौन्दर्यशास्त्र के तत्त्व |
| अश्वघोष | महायान श्रद्घत्पाद संग्रह, बुद्ध चरित, वज्र सूची |
| आर्यभट्ट | आर्यभट्ट तंत्र |
| वात्स्यायन | कामसूत्रम् |
| मंडन मिश्रा | भाव विवेक, विधि विवेक |
| विद्यापति | पदावली, कीर्तिलता, कीर्ति पताका, गौरक्षा विजय, भू-परिक्रमा |
| दाउद | चंद्रायन |
| ज्योतिरीश्वर ठाकुर | वर्ण रत्नाकर, दर्शन रत्नाकर |
| राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह | पुरुष और नारी |
| मैथिलीशरण गुप्त | साकेत ,यशोधरा ,भारत भारती ,सिद्धराज ,द्वापर ,पंचवटी |
| जयशंकर प्रसाद | कामायनी ,झरना ,आँसू, लहर ,कामना ,कल्याणी ,स्कंदगुप्त,विशाख ,आकशदीप |
| सुमित्रानंदन पन्त | कला और बूढा चाँद ,पल्लव ,गुंजन ,लोकायतन ,चिदंबरा ,उत्तरा |
मैथली कवि कोकिल विद्यापति का परिचय
मैथिल कवि कोकिल, रसासिद्ध कवि विद्यापति, तुलसी, सूर, कबूर, मीरा सभी से पहले के कवि हैं। अमीर खुसरो यद्यपि इनसे पहले हुए थे। इनका संस्कृत, प्राकृत अपभ्रंश एवं मातृ भाषा मैथिली पर समान अधिकार था। विद्यापति की रचनाएँ संस्कृत, अवहट्ट, एवं मैथिली तीनों में मिलती हैं।
महाकवि विद्यापति संस्कृत, अबहट्ठ, मैथिली आदि अनेक भाषाओं के प्रकाण्ड पंडित थे। शास्र और लोक दोनों ही संसार में उनका असाधारण अधिकार था।
महाकवि ओईनवार राजवंश के अनेक राजाओं के शासनकाल में विराजमान रहकर अपने वैदुश्य एवं दूरदर्शिता सो उनका मार्गदर्शन करते रहे।
संस्कृत में– पुरुषपरीक्षा
भूपरिक्रमा : राजा देव सिंह की आज्ञा से विद्यापति ने इसे लिखा। इसमें बलराम से सम्बंधित शाप की कहानियाँ हैं जो मिथिला में सुनाई थी। लिखनावली, शैवसर्वस्वसार, शैवसर्वस्व सार प्रमाण भूतपुराणसंग्रह, गंगावाक्यावली, विभागसार, दानवाक्यावली ,दुर्गाभक्तितरंगिणी, गयापत्तलक,वर्षकृत्य
अवहट्ट में– कीर्तिलता (कीर्तिपताका तथा शिवसिंह का राज्यारोहण वर्णन एवं युद्ध-वर्णन)
मैथिली में – पदावली
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